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सबका मालिक एक है
साई बाबा की सबसे बड़ी शिक्षा और सन्देश है कि जाति, धर्म, समुदाय, आदि व्यर्थ की बातों में ना पड़कर
आपसी मतभेद भुलाकर आपस में प्रेम और सदभावाना से रहना चाहिए क्योकि सबका मलिक एक है।
श्रद्धा और सबूरी
साई बाबा ने अपने जीवन में यह सन्देश दिया है कि हमेशा श्रद्धा और विश्वास के साथ जीवन यापन करते हुए
सबूरी (सब्र)के साथ जीवन व्यतीत करें।
मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है
साई बाबा ने कभी भी किसी को धर्म की अवहेलना नहीं की अपितु सभी धर्मों का सम्मान करने की सलाह देते
हुए हमेशा मनवता को ही सबसे बडा धर्म और कर्म बताते हुए जीवन जीने की अमूल्य शिक्षा प्रदान की है।
जातिगत भेद भुला कर प्रेम पूर्वक रहना
साई बाबा ने कहा है की जाति,समाज,भेद-भाव,आदि सब बाते ईश्वर ने नहीं बल्कि इंसानों द्वारा बनाया गया
हैं इसलिए ईश्वर की नजर में न तो कोई उच्च है और न ही कोई निम्न इसलिए जो काम ईश्वर को भी पसंद नहीं
है वह मनुष्यों को तो करना ही नहीं चाहिए। अर्थात जात-पात,धर्म,समाज आदि मिथ्या बातों में न पड़ कर
आपस में प्रेमपूर्वक रहकर जीवन व्यतीत करना चाहिए।
गरीबो और लाचार की मदद करना सबसे बड़ी पूजा है
साई बाबा ने हमेशा ही सभी जनमानस से यही बार-बार कहा है कि सभी के साथ ही समानता का व्यवहार
करना चाहिए। गरीबों और लाचारों की यथासम्भव मदद करना चाहिए और यही सबसे बडी पूजा है। क्योकि
जो गरीबों, लाचारों की मदद करता है ईश्वर उसकी मदद करता है।
माता-पिता, बुजुर्गो, गुरुजनों, बडो का सम्मान करनाचाहिए
साई बाबा हमेशा ही समझाते थे कि अपने से बडो का आदर सम्मान करना चाहिए। गुरुजनो बुजर्गो को
सम्मान करना जिसस उनका आर्शीवाद प्राप्त होता है जिससे हमारे जीवन की मुश्किलों में सहायता मिलती
है।